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“गुगली की चुगली”

बुक रिव्यू  by रूपेश कुमार 

बहुत दिनों से अपने लेखन के कार्य में वयस्त रहने के कारण , किताबों का पढ़ना तो जारी था मगर उसके ऊपर अपनी राय देने का समय नहीं मिल पाया था , आखिर में जब मेरे हाथ ज्ञानेश जी की गुगली  जो राजपाल प्रकाशन द्वारा पब्लिश कि गयी है ,आई तो सच बताऊँ तो खुद को रोक नहीं पाया , एक युवा लेखक जिसकी ये पहली हिन्दी बूक है एक इंग्लिश में आ चुकी है,ने गज़ब की कारीगरी कहानी गढ़ने मे और सुनाने में दिखाई है।

यूं कहें की मजेदार इतनी की मैं “गुगली की चुगली” करने से खुद को रोक नहीं पाया । स्कूल के आखिरी और काॅलेज के शुरुआती वर्षों का यादगार और बेफिक्री वाले दिन । एक दम पक्की वाली दोस्ती और वो पहला वाला पवित्र प्रेम।

सच मानो जब आप आकाश , कमलेश ,योगेश ,खिलेश, अनूप भाई , शिल्पा और महिरा की दुनिया में जाओगे , तो खुद को उनके बीच पाओगे ,सच कहूँ तो जब मैं किताब को पढ़ रहा था , तब मैं भी उस दौर में पहुँच चुका था , और बहुत सारी घटनाएँ हूबहू हम लोगों के साथ हुआ था ,हमने भी बँक मारा था , हम भी धरे गए थे , अब क्या बताएं … हाँ ये धोनी युग के हैं बच्चे हम सचिन वाले हैं , मगर जुनून और वो उतावलापन , और समय के साथ आया ठहराव सब बहुत ही सच्चाई के साथ ज्ञानेश जी ने उकेरा है।

पढ़ते पढ़ते मुझे ये लगा की न केवल कहानी के पात्रों ने इस कहानी को जिया है, ज्ञानेश भी इसका हिस्सा हैं, मैंने तो अपनी कह दी मै उस दौर में पहुँच चुका था , अब आप भी पढ़िये इसे और कहानी को महसूस कीजिये , फिर हम सब ज्ञानेश जी सॉरी कहानी के आकाश से उसकी महिरा का पता पूछेंगे …चलिये आप सब किताब मँगवा लीजिये लिंक नीचे है …

नोट- आपको अपनी बूक रिव्यू करवानी हो तो आप मुझे मेल कर सकते हैं  rupeshkr01@gmail.com पे

रुपेश कुमार
लेखक/ घोस्ट रायटर/आंतरप्रेन्योर / शिक्षाविद / ब्लॉगर/  ।Very soon you can get view on channel  https://www.youtube.com/c/Bebaakinfotainment you can buy book from below link..!!

 

Rupesh
Author: Rupesh

By Rupesh

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